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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का तात्कालिक शकुनों द्वारा राक्षसों के विनाश और अपनी विजय की सम्भावना करके सीता सहित लक्ष्मण को पर्वत की गुफा में भेजना और युद्ध के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.24.36 
तत्कार्मुकैराभरणै रथैश्च
तद्वर्मभिश्चाग्निसमानवर्णै:।
बभूव सैन्यं पिशिताशनानां
सूर्योदये नीलमिवाभ्रजालम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
धनुष, आभूषण, रथ और अग्नि के समान चमकते हुए कवचों से सुसज्जित वह भूत-सेना सूर्योदय के समय नीले बादलों के समान दिखाई दे रही थी।
 
Adorned with bows, ornaments, chariots and shining armours glowing like fire, that army of ghosts appeared like clouds of blue at sunrise.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽरण्यकाण्डे चतुर्विंश: सर्ग: ॥ २ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अरण्यकाण्डमें चौबीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २ ४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)