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ramayan 3.24.35: श्री रामजी को तेज से युक्त देखकर वन देवता व्याकुल हो गए। उस समय क्रोध में भरे हुए श्री रामजी का रूप ऐसा प्रतीत होने लगा, मानो दक्षयज्ञ का विध्वंस करने के लिए तत्पर पिनाक धारण किए हुए महादेवजी हों॥35॥   |   ramayan सर्ग 3.24: श्रीराम का तात्कालिक शकुनों द्वारा राक्षसों के विनाश और अपनी विजय की सम्भावना करके सीता सहित लक्ष्मण को पर्वत की गुफा में भेजना और युद्ध के लिये उद्यत होना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का तात्कालिक शकुनों द्वारा राक्षसों के विनाश और अपनी विजय की सम्भावना करके सीता सहित लक्ष्मण को पर्वत की गुफा में भेजना और युद्ध के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.24.35 
तं दृष्ट्वा तेजसाऽऽविष्टं प्राव्यथन् वनदेवता:।
तस्य रुष्टस्य रूपं तु रामस्य ददृशे तदा।
दक्षस्येव क्रतुं हन्तुमुद्यतस्य पिनाकिन:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी को तेज से युक्त देखकर वन देवता व्याकुल हो गए। उस समय क्रोध में भरे हुए श्री रामजी का रूप ऐसा प्रतीत होने लगा, मानो दक्षयज्ञ का विध्वंस करने के लिए तत्पर पिनाक धारण किए हुए महादेवजी हों॥35॥
 
Seeing Shri Ram possessed by the effulgence, the forest gods became distressed. At that time, the form of Shri Ram, filled with anger, started appearing like Mahadevji wearing Pinaka, ready to destroy Dakshayagya. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)