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ramayan 3.24.2: प्रजा के अहित की सूचना देने वाले उन भयंकर उत्पातों को देखकर श्री रामचन्द्रजी राक्षसों के उत्पात को सोचकर अत्यन्त क्रोधित हो गए और लक्ष्मण से इस प्रकार बोले-॥2॥   |   ramayan सर्ग 3.24: श्रीराम का तात्कालिक शकुनों द्वारा राक्षसों के विनाश और अपनी विजय की सम्भावना करके सीता सहित लक्ष्मण को पर्वत की गुफा में भेजना और युद्ध के लिये उद्यत होना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का तात्कालिक शकुनों द्वारा राक्षसों के विनाश और अपनी विजय की सम्भावना करके सीता सहित लक्ष्मण को पर्वत की गुफा में भेजना और युद्ध के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.24.2 
तानुत्पातान् महाघोरान् रामो दृष्ट्वात्यमर्षण:।
प्रजानामहितान् दृष्ट्वा वाक्यं लक्ष्मणमब्रवीत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
प्रजा के अहित की सूचना देने वाले उन भयंकर उत्पातों को देखकर श्री रामचन्द्रजी राक्षसों के उत्पात को सोचकर अत्यन्त क्रोधित हो गए और लक्ष्मण से इस प्रकार बोले-॥2॥
 
Seeing those terrible mischiefs which were giving information about the harm of the people, Shri Ramchandraji became very angry thinking about the disturbance of the demons and said to Lakshman thus - ॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)