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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का तात्कालिक शकुनों द्वारा राक्षसों के विनाश और अपनी विजय की सम्भावना करके सीता सहित लक्ष्मण को पर्वत की गुफा में भेजना और युद्ध के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.24.13 
प्रतिकूलितुमिच्छामि न हि वाक्यमिदं त्वया।
शापितो मम पादाभ्यां गम्यतां वत्स मा चिरम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘पुत्र! मैं नहीं चाहता कि तुम मेरी प्रतिज्ञा के विरुद्ध कुछ भी कहो या करो। मैं अपने चरणों की शपथ खाकर कहता हूँ कि तुम शीघ्र चले जाओ।॥13॥
 
‘Son! I do not want you to say or do anything against my promise. I swear by my feet that you should go away quickly.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)