Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.23.21-22h: 'यदि मैं क्रोधित हो जाऊँ, तो मृत्यु को भी अपने चंगुल में फँसा सकता हूँ। आज मैं अपने तीखे बाणों से अभिमानी राम और उनके भाई लक्ष्मण का वध किए बिना पीछे नहीं हट सकता।' | ramayan सर्ग 3.23: भयंकर उत्पातों को देखकर भी खर का उनकी परवा नहीं करना तथा राक्षस सेना का श्रीराम के आश्रम के समीप पहुँचना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'यदि मैं क्रोधित हो जाऊँ, तो मृत्यु को भी अपने चंगुल में फँसा सकता हूँ। आज मैं अपने तीखे बाणों से अभिमानी राम और उनके भाई लक्ष्मण का वध किए बिना पीछे नहीं हट सकता।'
'If I become angry, I can even put death in its clutches. Today I cannot turn back without killing the proud Ram and his brother Lakshman with my sharp arrows. 21/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥