श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 23: भयंकर उत्पातों को देखकर भी खर का उनकी परवा नहीं करना तथा राक्षस सेना का श्रीराम के आश्रम के समीप पहुँचना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.23.15 
चीचीकूचीति वाश्यन्त्यो बभूवुस्तत्र सारिका:।
उल्काश्चापि सनिर्घोषा निपेतुर्घोरदर्शना:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ वन के पक्षी कलरव करने लगे। भयंकर ध्वनि के साथ आकाश से पृथ्वी पर भयंकर उल्काएँ गिरने लगीं॥15॥
 
There the forest's birds began chirping. With a loud sound, terrible meteors began falling from the sky to the earth.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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