Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.23.11-12: सूर्य के निकट एक सिरविहीन धड़ प्रकट हुआ, जो परिघ के समान था। राहु नामक महाग्रह अमावस्या के बिना ही सूर्य को निगलने लगा। वायु तीव्र गति से बहने लगी और सूर्यदेव का तेज क्षीण हो गया। ॥11-12॥ | ramayan सर्ग 3.23: भयंकर उत्पातों को देखकर भी खर का उनकी परवा नहीं करना तथा राक्षस सेना का श्रीराम के आश्रम के समीप पहुँचना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सूर्य के निकट एक सिरविहीन धड़ प्रकट हुआ, जो परिघ के समान था। राहु नामक महाग्रह अमावस्या के बिना ही सूर्य को निगलने लगा। वायु तीव्र गति से बहने लगी और सूर्यदेव का तेज क्षीण हो गया। ॥11-12॥
A headless torso appeared near the Sun, like a Parigha. The great planet Rahu began to swallow the Sun even without the New Moon. The wind began to blow at a fast speed and the radiance of the Sun God faded. ॥11-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥