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ramayan 3.23.1: जब सेना जा रही थी, तब आकाश में गधे के समान धूसर रंग का एक बड़ा और भयानक बादल उमड़ आया, वह जोर-जोर से गर्जना करने लगा और सैनिकों पर रक्तवर्णी जल की वर्षा होने लगी, जो अत्यन्त अशुभ संकेत था॥1॥   |   ramayan सर्ग 3.23: भयंकर उत्पातों को देखकर भी खर का उनकी परवा नहीं करना तथा राक्षस सेना का श्रीराम के आश्रम के समीप पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 23: भयंकर उत्पातों को देखकर भी खर का उनकी परवा नहीं करना तथा राक्षस सेना का श्रीराम के आश्रम के समीप पहुँचना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.23.1 
तत्प्रयातं बलं घोरमशिवं शोणितोदकम्।
अभ्यवर्षन्महाघोरस्तुमुलो गर्दभारुण:॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब सेना जा रही थी, तब आकाश में गधे के समान धूसर रंग का एक बड़ा और भयानक बादल उमड़ आया, वह जोर-जोर से गर्जना करने लगा और सैनिकों पर रक्तवर्णी जल की वर्षा होने लगी, जो अत्यन्त अशुभ संकेत था॥1॥
 
When the army was leaving, a huge and terrifying cloud of grey colour like a donkey gathered in the sky. It started roaring loudly and a rain of bloody water started pouring on the soldiers indicating a very ominous omen.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)