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ramayan 3.20.7-8: हम दोनों भाई राजा दशरथ के पुत्र राम और लक्ष्मण हैं। हम सीता सहित इस दुर्गम दण्डकारण्य में आकर फल-मूल खाते हैं, संयमपूर्वक तपस्या करते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। आप दण्डकारण्य वन में इस प्रकार रहने वाले हम दोनों भाइयों का अनिष्ट क्यों करना चाहते हैं?॥ 7-8॥   |   ramayan सर्ग 3.20: श्रीराम द्वारा खर के भेजे हुए चौदह राक्षसों का वध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 20: श्रीराम द्वारा खर के भेजे हुए चौदह राक्षसों का वध  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  3.20.7-8 
पुत्रौ दशरथस्यावां भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।
प्रविष्टौ सीतया सार्धं दुश्चरं दण्डकावनम्॥ ७॥
फलमूलाशनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ।
वसन्तौ दण्डकारण्ये किमर्थमुपहिंसथ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हम दोनों भाई राजा दशरथ के पुत्र राम और लक्ष्मण हैं। हम सीता सहित इस दुर्गम दण्डकारण्य में आकर फल-मूल खाते हैं, संयमपूर्वक तपस्या करते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। आप दण्डकारण्य वन में इस प्रकार रहने वाले हम दोनों भाइयों का अनिष्ट क्यों करना चाहते हैं?॥ 7-8॥
 
‘We two brothers are King Dasharath's sons Rama and Lakshmana. We have come to this remote Dandakaranya with Sita and we eat fruits and roots, engage in austerities with self-control and follow celibacy. Why do you want to harm us two brothers who are thus living in the Dandakaranya forest?॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)