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श्लोक 3.20.25  |
निपातितान् प्रेक्ष्य रणे तु राक्षसान्
प्रधाविता शूर्पणखा पुनस्तत:।
वधं च तेषां निखिलेन रक्षसां
शशंस सर्वं भगिनी खरस्य सा॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| उन राक्षसों को युद्धभूमि में मारा गया देखकर खरकी की बहन शूर्पणखा वहाँ से पुनः दौड़ती हुई आई और उसने उन समस्त राक्षसों के मारे जाने का सारा वृत्तांत अपने भाई को सुनाया॥ 25॥ |
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| Seeing those demons killed on the battlefield, Kharki's sister Shurpanakha came running from there again. She told the whole story of the killing of all those demons to her brother.॥ 25॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽरण्यकाण्डे विंश: सर्ग: ॥ २ ०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अरण्यकाण्डमें बीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २ ०॥ |
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