vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 20: श्रीराम द्वारा खर के भेजे हुए चौदह राक्षसों का वध
»
श्लोक 24
श्लोक
3.20.24
भ्रातु: समीपे शोकार्ता ससर्ज निनदं महत् ।
सस्वरं मुमुचे बाष्पं विवर्णवदना तदा॥ २४॥
अनुवाद
भाई के वियोग से शोकाकुल शूर्पणखा जोर-जोर से रोने लगी और बहुत रोने लगी। उस समय उसके मुख की कान्ति लुप्त हो गई थी॥ 24॥
Surpanakha, grief-stricken at the loss of her brother, began to cry loudly and weep profusely. At that time the glow on her face had faded.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×