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श्लोक 3.20.24  |
भ्रातु: समीपे शोकार्ता ससर्ज निनदं महत् ।
सस्वरं मुमुचे बाष्पं विवर्णवदना तदा॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| भाई के वियोग से शोकाकुल शूर्पणखा जोर-जोर से रोने लगी और बहुत रोने लगी। उस समय उसके मुख की कान्ति लुप्त हो गई थी॥ 24॥ |
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| Surpanakha, grief-stricken at the loss of her brother, began to cry loudly and weep profusely. At that time the glow on her face had faded.॥ 24॥ |
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