vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 20: श्रीराम द्वारा खर के भेजे हुए चौदह राक्षसों का वध
»
श्लोक 13
श्लोक
3.20.13
क्रोधमुत्पाद्य नो भर्तु: खरस्य सुमहात्मन:।
त्वमेव हास्यसे प्राणान् सद्योऽस्माभिर्हतो युधि॥ १३॥
अनुवाद
'अहा! तुमने हमारे स्वामी महाकाय खर को क्रोधित किया है; इसलिए तुम स्वयं युद्ध में हमारे द्वारा मारे जाकर तुरंत ही अपने प्राण खो दोगे॥13॥
'Oh! You have angered our lord Mahakaya Khar; therefore, you yourself will lose your life immediately by being killed by us in the battle.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×