Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.2.14-15: दुष्ट विराध के ये दुष्टतापूर्ण और अभिमानपूर्ण वचन सुनकर जनकननदिनी सीता भयभीत हो गईं और चिन्ता से काँपने लगीं, जैसे तेज हवा चलने पर केले का वृक्ष जोर से हिलने लगता है॥15॥ | ramayan सर्ग 3.2: वन के भीतर श्रीराम, लक्ष्मण और सीता पर विराध का आक्रमण । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दुष्ट विराध के ये दुष्टतापूर्ण और अभिमानपूर्ण वचन सुनकर जनकननदिनी सीता भयभीत हो गईं और चिन्ता से काँपने लगीं, जैसे तेज हवा चलने पर केले का वृक्ष जोर से हिलने लगता है॥15॥
Hearing these wicked and arrogant words of the evil-spirited Viradha, Janakanandini Sita became frightened and began to tremble in anxiety just as a banana tree shakes violently when a strong wind blows.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥