Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.19.7: 'मुझे इस संसार में ऐसा कोई नहीं दिखता जो मुझे अप्रसन्न कर सके। मुझे नहीं लगता कि देवताओं में सहस्त्र नेत्रों वाला पक्षाघाती इन्द्र भी ऐसा करने का साहस कर सकता है। | ramayan सर्ग 3.19: शूर्पणखा के मुख से उसकी दुर्दशा का वृत्तान्त सुनकर क्रोध में भरे हए खर का श्रीराम आदि के वध के लिये चौदह राक्षसों को भेजना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'मुझे इस संसार में ऐसा कोई नहीं दिखता जो मुझे अप्रसन्न कर सके। मुझे नहीं लगता कि देवताओं में सहस्त्र नेत्रों वाला पक्षाघाती इन्द्र भी ऐसा करने का साहस कर सकता है।
'I do not see anyone in this world who can displease me. I do not see that even the thousand-eyed Pakshashan Indra among the gods can dare to do this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥