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श्लोक 3.19.13  |
इति भ्रातुर्वच: श्रुत्वा क्रुद्धस्य च विशेषत:।
तत: शूर्पणखा वाक्यं सबाष्पमिदमब्रवीत्॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| अपने भाई के, विशेषतः क्रोध में भरे हुए अपने भाई खर के ये वचन सुनकर शूर्पणखा ने नेत्रों में आँसू भरकर इस प्रकार कहा -॥13॥ |
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| Upon hearing these words of her brother, especially of her brother Khara who was filled with anger, Shurpanakha spoke thus with tears in her eyes -॥ 13॥ |
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