श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम के टाल देने पर शूर्पणखा का लक्ष्मण से प्रणययाचना करना, फिर उनके भी टालने पर उसका सीता पर आक्रमण और लक्ष्मण का उसके नाक-कान काट लेना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.18.6 
इति रामेण सा प्रोक्ता राक्षसी काममोहिता।
विसृज्य रामं सहसा ततो लक्ष्मणमब्रवीत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी की यह बात सुनकर काम में मोहित हुई वह राक्षसी उन्हें छोड़कर सहसा लक्ष्मण के पास गई और इस प्रकार बोली -॥6॥
 
Upon hearing Sri Rama say this, the demoness, infatuated by lust, left him and suddenly went to Lakshmana and spoke thus -॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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