श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम के टाल देने पर शूर्पणखा का लक्ष्मण से प्रणययाचना करना, फिर उनके भी टालने पर उसका सीता पर आक्रमण और लक्ष्मण का उसके नाक-कान काट लेना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.18.20 
इमां विरूपामसतीमतिमत्तां महोदरीम्।
राक्षसीं पुरुषव्याघ्र विरूपयितुमर्हसि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'हे नरसिंह! इस कुरूप, दुराचारी, अत्यन्त मतवाली, बड़े पेट वाली राक्षसी को तुम विकृत कर दो, तथा शरीर के किसी अंग से विहीन कर दो।'
 
'O lion of men! You should make this ugly, immoral, extremely drunk and big-bellied demoness deformed and devoid of some body part.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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