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ramayan 3.17.27: 'मेरी दृष्टि में यह सीता कुरूप, नीच, कुरूप, पेटवाली और मनुष्य है। मैं इसे तुम्हारे इस भाई के साथ खा जाऊँगा॥ 27॥   |   ramayan सर्ग 3.17: श्रीराम के आश्रम में शूर्पणखा का आना, उनका परिचय जानना और अपना परिचय देकर उनसे अपने को भार्या के रूप में ग्रहण करने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 17: श्रीराम के आश्रम में शूर्पणखा का आना, उनका परिचय जानना और अपना परिचय देकर उनसे अपने को भार्या के रूप में ग्रहण करने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.17.27 
इमां विरूपामसतीं करालां निर्णतोदरीम्।
अनेन सह ते भ्रात्रा भक्षयिष्यामि मानुषीम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'मेरी दृष्टि में यह सीता कुरूप, नीच, कुरूप, पेटवाली और मनुष्य है। मैं इसे तुम्हारे इस भाई के साथ खा जाऊँगा॥ 27॥
 
'In my eyes this Sita is ugly, mean, deformed, with a sunken belly and a human being. I will eat her along with this brother of yours.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)