श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 16: लक्ष्मण के द्वारा हेमन्त ऋतु का वर्णन और भरत की प्रशंसा तथा श्रीराम का उन दोनों के साथ गोदावरी नदी में स्नान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.16.9 
प्रकृत्या हिमकोशाढॺो दूरसूर्यश्च साम्प्रतम्।
यथार्थनामा सुव्यक्तं हिमवान् हिमवान् गिरि:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘हिमालय पर्वत स्वाभाविक रूप से सघन हिम के भण्डार से भरा हुआ है, किन्तु इस समय सूर्यदेव भी दक्षिणी गोलार्ध की ओर चले जाने के कारण उससे दूर चले गए हैं; अतः अब अधिक हिम से भरकर हिमवान गिरि स्पष्टतः अपने नाम के अनुरूप चरितार्थ हो रहा है।॥9॥
 
‘The Himalaya mountain is naturally filled with the treasure of dense snow, but at this time the Sun God has also moved away from it due to moving towards the southern hemisphere; hence, now filled with more snow, Himavan Giri is clearly living up to its name.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)