श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 16: लक्ष्मण के द्वारा हेमन्त ऋतु का वर्णन और भरत की प्रशंसा तथा श्रीराम का उन दोनों के साथ गोदावरी नदी में स्नान  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  3.16.31-32 
पद्मपत्रेक्षण: श्याम: श्रीमान् निरुदरो महान्।
धर्मज्ञ: सत्यवादी च ह्रीनिषेवी जितेन्द्रिय:॥ ३१॥
प्रियाभिभाषी मधुरो दीर्घबाहुररिंदम:।
संत्यज्य विविधान् सौख्यानार्यं सर्वात्मनाश्रित:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जिनके नेत्र कमल के समान सुन्दर हैं, जिनके अंग श्याम हैं और जिनका उदर अदृश्य है, ऐसे महान् धर्मात्मा, सत्यवादी, लज्जाशील, बुद्धिमान, प्रिय वचन बोलने वाले, कोमल स्वभाव वाले, महाबाहु शत्रुदमन श्री भरतजी सब प्रकार के सुखों को त्यागकर पूर्णतः आपकी शरण में आये हैं ॥31-32॥
 
'Whose eyes are as beautiful as a lotus, whose limbs are dark and whose abdomen is not visible, such a great religious person, truthful, shy, intelligent, speaking loving words, soft-natured, powerful-armed Shatrudaman Shri Bharat, having given up all kinds of pleasures, have completely taken refuge in you. 31-32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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