श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 16: लक्ष्मण के द्वारा हेमन्त ऋतु का वर्णन और भरत की प्रशंसा तथा श्रीराम का उन दोनों के साथ गोदावरी नदी में स्नान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.16.1 
वसतस्तस्य तु सुखं राघवस्य महात्मन:।
शरद्‍व्यपाये हेमन्तऋतुरिष्ट: प्रवर्तत॥ १॥
 
 
अनुवाद
महात्मा श्री राम जब उस आश्रम में निवास कर रहे थे, तब शरद ऋतु बीत गई और प्रिय शीत ऋतु का आगमन हुआ ॥1॥
 
While Mahatma Shri Ram was staying in that ashram the autumn season passed and the beloved winter season began. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)