Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.15.29: 'लक्ष्मण! आप मेरे भावों को शीघ्र समझने वाले, कृतज्ञ और धर्म के ज्ञाता हैं। आप जैसे पुत्र के कारण ही मेरे धर्मात्मा पिता अभी तक मरे नहीं हैं - वे आपके रूप में अभी भी जीवित हैं।'॥29॥ | ramayan सर्ग 3.15: पञ्चवटी के रमणीय प्रदेश में श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण द्वारा सुन्दर पर्णशाला का निर्माण तथा उसमें सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का निवास । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भावज्ञेन कृतज्ञेन धर्मज्ञेन च लक्ष्मण।
त्वया पुत्रेण धर्मात्मा न संवृत्त: पिता मम॥ २९॥
अनुवाद
'लक्ष्मण! आप मेरे भावों को शीघ्र समझने वाले, कृतज्ञ और धर्म के ज्ञाता हैं। आप जैसे पुत्र के कारण ही मेरे धर्मात्मा पिता अभी तक मरे नहीं हैं - वे आपके रूप में अभी भी जीवित हैं।'॥29॥
'Lakshman! You are quick to understand my feelings, grateful and knowledgeable about Dharma. Because of a son like you, my righteous father is not dead yet - he is still alive in your form.'॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥