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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 15: पञ्चवटी के रमणीय प्रदेश में श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण द्वारा सुन्दर पर्णशाला का निर्माण तथा उसमें सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का निवास  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.15.25 
तत: पुष्पबलिं कृत्वा शान्तिं च स यथाविधि।
दर्शयामास रामाय तदाश्रमपदं कृतम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने शास्त्रीय विधि के अनुसार देवताओं को पुष्प (उपहार) अर्पित किए और वास्तुशांति करके श्री रामचन्द्रजी को अपना बनाया हुआ आश्रम दिखाया॥25॥
 
Thereafter, according to the classical method, he offered flowers (gifts) to the gods and after doing Vaastu Shanti, he showed the ashram built by him to Shri Ramchandraji. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)