vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 15: पञ्चवटी के रमणीय प्रदेश में श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण द्वारा सुन्दर पर्णशाला का निर्माण तथा उसमें सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का निवास
»
श्लोक 20
श्लोक
3.15.20
एवमुक्तस्तु रामेण लक्ष्मण: परवीरहा।
अचिरेणाश्रमं भ्रातुश्चकार सुमहाबल:॥ २०॥
अनुवाद
श्री राम की यह बात सुनकर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले पराक्रमी लक्ष्मण ने शीघ्र ही अपने भाई के लिए एक आश्रम बनवाया।
Upon hearing Sri Rama say this, the mighty Lakshmana, the slayer of enemy warriors, quickly built an ashram for his brother.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×