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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 15: पञ्चवटी के रमणीय प्रदेश में श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण द्वारा सुन्दर पर्णशाला का निर्माण तथा उसमें सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का निवास  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.15.19 
इदं पुण्यमिदं रम्यमिदं बहुमृगद्विजम्।
इह वत्स्याम सौमित्रे सार्धमेतेन पक्षिणा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'सुमित्रनंदन! यह बहुत पवित्र और सुंदर स्थान है। यहाँ अनेक पशु-पक्षी रहते हैं। हम भी इस पक्षीराज जटायु के साथ यहाँ रहेंगे।'
 
'Sumitra Nandan! This is a very holy and beautiful place. Many animals and birds live here. We will also live here with this bird king Jatayu.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)