श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 15: पञ्चवटी के रमणीय प्रदेश में श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण द्वारा सुन्दर पर्णशाला का निर्माण तथा उसमें सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का निवास  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.15.12 
यथाख्यातमगस्त्येन मुनिना भावितात्मना।
इयं गोदावरी रम्या पुष्पितैस्तरुभिर्वृता॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'यह वही सुन्दर गोदावरी नदी है, जो हरे-भरे वृक्षों से घिरी हुई है, जिसके विषय में शुद्धहृदय वाले अगस्त्य मुनि ने कहा था।॥12॥
 
'This is the beautiful river Godavari, surrounded by lush green trees, that the pure-hearted sage Agastya had spoken about.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)