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ramayan 3.15.1: नाना प्रकार के सर्पों, हिंसक पशुओं और मृगों से भरी हुई पंचवटी में पहुँचकर श्री राम ने तेजस्वी तेज वाले अपने भाई लक्ष्मण से कहा- 1॥   |   ramayan सर्ग 3.15: पञ्चवटी के रमणीय प्रदेश में श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण द्वारा सुन्दर पर्णशाला का निर्माण तथा उसमें सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का निवास   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 15: पञ्चवटी के रमणीय प्रदेश में श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण द्वारा सुन्दर पर्णशाला का निर्माण तथा उसमें सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का निवास  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.15.1 
तत: पञ्चवटीं गत्वा नानाव्यालमृगायुताम्।
उवाच लक्ष्मणं रामो भ्रातरं दीप्ततेजसम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार के सर्पों, हिंसक पशुओं और मृगों से भरी हुई पंचवटी में पहुँचकर श्री राम ने तेजस्वी तेज वाले अपने भाई लक्ष्मण से कहा- 1॥
 
After reaching Panchvati, which was filled with various types of snakes, violent animals and deer, Shri Ram said to his brother Lakshmana of radiant radiance - 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)