श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 14: पञ्चवटी के मार्ग में जटायु का मिलना और श्रीराम को अपना विस्तृत परिचय देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.14.5 
रामस्य वचनं श्रुत्वा कुलमात्मानमेव च।
आचचक्षे द्विजस्तस्मै सर्वभूतसमुद्भवम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
श्री राम का यह प्रश्न सुनकर उस पक्षी ने अपने कुल और नाम से अपना परिचय दिया और फिर समस्त प्राणियों की उत्पत्ति का क्रम बताने लगा॥5॥
 
On hearing this question from Shri Ram, the bird introduced itself to him by its clan and name and then began to tell him the sequence of origin of all creatures. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)