सोऽहं वाससहायस्ते भविष्यामि यदीच्छसि।
इदं दुर्गं हि कान्तारं मृगराक्षससेवितम्।
सीतां च तात रक्षिष्ये त्वयि याते सलक्ष्मणे॥ ३४॥
अनुवाद
'पिताजी! यदि आप चाहें तो मैं यहाँ आपके प्रवास में आपकी सहायता कर सकता हूँ। इस दुर्गम वन में मृग और राक्षस निवास करते हैं। यदि आप और लक्ष्मण कभी अपनी कुटिया से बाहर निकलेंगे, तो उस अवसर पर मैं देवी सीता की रक्षा करूँगा।'
'Father! If you wish, I will assist you in your stay here. This inaccessible forest is inhabited by deer and demons. If you and Lakshmana ever go out of your hut, I will protect Goddess Sita on that occasion.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)