श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 14: पञ्चवटी के मार्ग में जटायु का मिलना और श्रीराम को अपना विस्तृत परिचय देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.14.30 
मुखतो ब्राह्मणा जाता उरस: क्षत्रियास्तथा।
ऊरुभ्यां जज्ञिरे वैश्या: पद्‍भ्यां शूद्रा इति श्रुति:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'ब्राह्मण मुख से उत्पन्न हुए और क्षत्रिय हृदय से। वैश्य जंघाओं से और शूद्र पैरों से उत्पन्न हुए - ऐसी महिमा है।'
 
‘Brahmins were born from the mouth and Kshatriyas from the heart. Vaishyas were born from the thighs and Shudras from the feet – such is the fame.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)