श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 14: पञ्चवटी के मार्ग में जटायु का मिलना और श्रीराम को अपना विस्तृत परिचय देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.14.26 
मातङ्गॺास्त्वथ मातङ्गा अपत्यं मनुजर्षभ।
दिशागजं तु काकुत्स्थ श्वेता व्यजनयत् सुतम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'नरश्रेष्ठ! मातंगी की संतानें मातंग (हाथी) हैं। ककुत्स्थ! श्वेता ने एक दैत्य को पुत्र रूप में जन्म दिया। 26॥
 
'Narshrestha! Matangi's children are Matang (elephants). Kakutstha! Shweta gave birth to a giant as her son. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)