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ramayan 3.14.23: हे राजनश्रेष्ठ, हे राम! मृग की सारी संतानें मृग ही हैं और मृग की संतानें रीछ, सियार और चमर हैं॥23॥   |   ramayan सर्ग 3.14: पञ्चवटी के मार्ग में जटायु का मिलना और श्रीराम को अपना विस्तृत परिचय देना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.14.23 
अपत्यं तु मृगा: सर्वे मृग्या नरवरोत्तम।
ऋक्षाश्च मृगमन्दाया: सृमराश्चमरास्तथा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ, हे राम! मृग की सारी संतानें मृग ही हैं और मृग की संतानें रीछ, सियार और चमर हैं॥23॥
 
'O best of kings, O Rama! All the progeny of a deer are deer, and those of a deer are bears, foxes and chamars.॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)