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ramayan 3.13.18: 'रघुनंदन! वह मनभावन स्थान यहाँ से अधिक दूर नहीं है। वह गोदावरी के निकट (उसके तट पर) है, अतः मैथिली वहाँ बहुत सुखी रहेगी।॥18॥   |   ramayan सर्ग 3.13: महर्षि अगस्त्य का सीता की प्रशंसा करना, श्रीराम के पूछने पर उन्हें पञ्चवटी में आश्रम बनाकर रहने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 13: महर्षि अगस्त्य का सीता की प्रशंसा करना, श्रीराम के पूछने पर उन्हें पञ्चवटी में आश्रम बनाकर रहने का आदेश देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.13.18 
स देश: श्लाघनीयश्च नातिदूरे च राघव।
गोदावर्या: समीपे च मैथिली तत्र रंस्यते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! वह मनभावन स्थान यहाँ से अधिक दूर नहीं है। वह गोदावरी के निकट (उसके तट पर) है, अतः मैथिली वहाँ बहुत सुखी रहेगी।॥18॥
 
‘Raghunandan! That desirable place is not very far from here. It is near Godavari (on its banks), so Maithili will be very happy there.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)