Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.13.1: 'श्रीराम! आपका कल्याण हो। मैं आप पर बहुत प्रसन्न हूँ। लक्ष्मण! मैं भी आप पर बहुत प्रसन्न हूँ। मुझे बहुत प्रसन्नता है कि आप दोनों भाई सीता सहित मुझे प्रणाम करने यहाँ आए।॥1॥ | ramayan सर्ग 3.13: महर्षि अगस्त्य का सीता की प्रशंसा करना, श्रीराम के पूछने पर उन्हें पञ्चवटी में आश्रम बनाकर रहने का आदेश देना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राम प्रीतोऽस्मि भद्रं ते परितुष्टोऽस्मि लक्ष्मण।
अभिवादयितुं यन्मां प्राप्तौ स्थ: सह सीतया॥ १॥
अनुवाद
'श्रीराम! आपका कल्याण हो। मैं आप पर बहुत प्रसन्न हूँ। लक्ष्मण! मैं भी आप पर बहुत प्रसन्न हूँ। मुझे बहुत प्रसन्नता है कि आप दोनों भाई सीता सहित मुझे प्रणाम करने यहाँ आए।॥1॥
'Shri Ram! May you be blessed. I am very pleased with you. Lakshman! I am also very pleased with you. I am very pleased that you two brothers came here with Sita to pay your respects to me.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥