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ramayan 3.12.6-7h: अग्निकोष्ठ में प्रवेश करके अगस्त्य का वह प्रिय शिष्य, जो अपनी तपस्या के कारण दूसरों के लिए अजेय था, महामुनि अगस्त्य के पास गया, हाथ जोड़े और लक्ष्मण के कहे अनुसार शीघ्रता से उनसे श्री रामचन्द्रजी के आगमन का समाचार कहा - ॥6 1/2॥   |   ramayan सर्ग 3.12: श्रीराम आदि का अगस्त्य के आश्रम में प्रवेश, अतिथि-सत्कार तथा मुनि की ओर से उन्हें दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 12: श्रीराम आदि का अगस्त्य के आश्रम में प्रवेश, अतिथि-सत्कार तथा मुनि की ओर से उन्हें दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की प्राप्ति  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  3.12.6-7h 
स प्रविश्य मुनिश्रेष्ठं तपसा दुष्प्रधर्षणम्।
कृताञ्जलिरुवाचेदं रामागमनमञ्जसा॥ ६॥
यथोक्तं लक्ष्मणेनैव शिष्योऽगस्त्यस्य सम्मत:।
 
 
अनुवाद
अग्निकोष्ठ में प्रवेश करके अगस्त्य का वह प्रिय शिष्य, जो अपनी तपस्या के कारण दूसरों के लिए अजेय था, महामुनि अगस्त्य के पास गया, हाथ जोड़े और लक्ष्मण के कहे अनुसार शीघ्रता से उनसे श्री रामचन्द्रजी के आगमन का समाचार कहा - ॥6 1/2॥
 
Entering the fire chamber, that beloved disciple of Agastya, who was invincible to others due to his penance, went to the great sage Agastya, folded his hands and quickly told him the news of Shri Ramchandraji's arrival as per Lakshman's words - ॥ 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)