श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 12: श्रीराम आदि का अगस्त्य के आश्रम में प्रवेश, अतिथि-सत्कार तथा मुनि की ओर से उन्हें दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की प्राप्ति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  3.12.3 
लक्ष्मणो नाम तस्याहं भ्राता त्ववरजो हित:।
अनुकूलश्च भक्तश्च यदि ते श्रोत्रमागत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'मैं उनका छोटा भाई, शुभचिंतक और मित्रवत भक्त हूँ। मेरा नाम लक्ष्मण है। संभव है कि आपने कभी यह नाम सुना हो।॥3॥
 
'I am his younger brother, well-wisher and friendly devotee. My name is Lakshmana. It is possible that you may have heard this name sometime.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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