श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 12: श्रीराम आदि का अगस्त्य के आश्रम में प्रवेश, अतिथि-सत्कार तथा मुनि की ओर से उन्हें दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की प्राप्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.12.2 
राजा दशरथो नाम ज्येष्ठस्तस्य सुतो बली।
राम: प्राप्तो मुनिं द्रष्टुं भार्यया सह सीतया॥ २॥
 
 
अनुवाद
'मुनि! अयोध्या के यशस्वी राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र पराक्रमी श्री रामचन्द्रजी अपनी पत्नी सीता के साथ महर्षि के दर्शन के लिए आये हैं।
 
'Muni! The mighty Shri Ramchandraji, the eldest son of the famous king Dasharath of Ayodhya, has come with his wife Sita to visit Maharshika.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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