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ramayan 3.12.13-14h: इसके बाद शिष्य आश्रम से निकलकर शीघ्रता से लक्ष्मण के पास गया और बोला, 'श्री रामचंद्रजी कौन हैं? उन्हें स्वयं आश्रम में प्रवेश करके मुनि के दर्शन करने जाना चाहिए।'॥13 1/2॥   |   ramayan सर्ग 3.12: श्रीराम आदि का अगस्त्य के आश्रम में प्रवेश, अतिथि-सत्कार तथा मुनि की ओर से उन्हें दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 12: श्रीराम आदि का अगस्त्य के आश्रम में प्रवेश, अतिथि-सत्कार तथा मुनि की ओर से उन्हें दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की प्राप्ति  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  3.12.13-14h 
तदा निष्क्रम्य सम्भ्रान्त: शिष्यो लक्ष्मणमब्रवीत्॥ १३॥
कोऽसौ रामो मुनिं द्रष्टुमेतु प्रविशतु स्वयम्।
 
 
अनुवाद
इसके बाद शिष्य आश्रम से निकलकर शीघ्रता से लक्ष्मण के पास गया और बोला, 'श्री रामचंद्रजी कौन हैं? उन्हें स्वयं आश्रम में प्रवेश करके मुनि के दर्शन करने जाना चाहिए।'॥13 1/2॥
 
After this the disciple left the hermitage and hurriedly went to Lakshmana and said, 'Who is Shri Ramachandraji? He should himself enter the hermitage and go to see the sage.'॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)