श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 12: श्रीराम आदि का अगस्त्य के आश्रम में प्रवेश, अतिथि-सत्कार तथा मुनि की ओर से उन्हें दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की प्राप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.12.1 
स प्रविश्याश्रमपदं लक्ष्मणो राघवानुज:।
अगस्त्यशिष्यमासाद्य वाक्यमेतदुवाच ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने आश्रम में प्रवेश करके अगस्त्य के शिष्य से भेंट की और उनसे यह कहा -॥1॥
 
Lakshmana, the younger brother of Shri Rama, entered the hermitage and met the disciple of Agastya and said the following to him -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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