Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.11.84: भगवान अगस्त्य के तेज से यह सम्पूर्ण दिशा तीनों लोकों में 'दक्षिणा' कहलायी, इस आश्रम के चारों ओर अभय आदि गुणों को प्रदान करने में समर्थ होने के कारण तथा क्रूर कर्म दानवों के लिए अजेय होने के कारण यह इसी नाम से प्रसिद्ध हुई और इसे 'अगस्त्य की दिशा' भी कहते हैं ॥84॥ | ramayan सर्ग 3.11: पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना तथा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भगवान अगस्त्य के तेज से यह सम्पूर्ण दिशा तीनों लोकों में 'दक्षिणा' कहलायी, इस आश्रम के चारों ओर अभय आदि गुणों को प्रदान करने में समर्थ होने के कारण तथा क्रूर कर्म दानवों के लिए अजेय होने के कारण यह इसी नाम से प्रसिद्ध हुई और इसे 'अगस्त्य की दिशा' भी कहते हैं ॥84॥
'Due to the glory of Lord Agastya, this entire direction was called 'Dakshina' in all the three worlds, due to it being capable of imparting the qualities of fearlessness etc. around this ashram and being invincible to cruel Karma demons, it became famous by this name and it is also called 'Agastya's Disha'. 84॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥