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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 11: पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना तथा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  3.11.69 
उपास्य पश्चिमां संध्यां सह भ्रात्रा यथाविधि।
प्रविवेशाश्रमपदं तमृषिं चाभ्यवादयत्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, निर्धारित अनुष्ठानों के अनुसार अपने भाई के साथ संध्या-पूजन करने के पश्चात्, श्री राम ने आश्रम में प्रवेश किया और महर्षि के चरणों में अपना सिर झुकाया।
 
Then, after performing the evening prayers with his brother as per the prescribed rituals, Sri Rama entered the hermitage and bowed his head at the feet of the great sage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)