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ramayan 3.11.65: 'अपने भाई की मृत्यु की सूचना देने वाले ऋषि के ये वचन सुनकर रात्रि-राक्षस क्रोधित होकर उसे मारने का प्रयत्न करने लगा।   |   ramayan सर्ग 3.11: पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना तथा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 11: पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना तथा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.11.65 
अथ तस्य वच: श्रुत्वा भ्रातुर्निधनसंश्रितम्।
प्रधर्षयितुमारेभे मुनिं क्रोधान्निशाचर:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
'अपने भाई की मृत्यु की सूचना देने वाले ऋषि के ये वचन सुनकर रात्रि-राक्षस क्रोधित होकर उसे मारने का प्रयत्न करने लगा।
 
'Hearing these words of the sage informing him of the death of his brother, the night-demon in anger began making efforts to kill him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)