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ramayan 3.11.60: इस प्रकार वे मांसभक्षी राक्षस इच्छानुसार कोई भी रूप धारण करके प्रतिदिन हजारों ब्राह्मणों का संहार करते थे।   |   ramayan सर्ग 3.11: पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना तथा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 11: पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना तथा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.11.60 
ब्राह्मणानां सहस्राणि तैरेवं कामरूपिभि:।
विनाशितानि संहत्य नित्यश: पिशिताशनै:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वे मांसभक्षी राक्षस इच्छानुसार कोई भी रूप धारण करके प्रतिदिन हजारों ब्राह्मणों का संहार करते थे।
 
'Thus, those carnivorous Demons, assuming any form at will, together destroyed thousands of Brahmins every day.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)