Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.11.49: इस वन में पके हुए दीर्घपत्री पौधों की यह गंध वायु के द्वारा अचानक उड़कर यहाँ आ गई है, और उसी से कड़वा रस निकल रहा है॥ 49॥ | ramayan सर्ग 3.11: पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना तथा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पिप्पलीनां च पक्वानां वनादस्मादुपागत:।
गन्धोऽयं पवनोत्क्षिप्त: सहसा कटुकोदय:॥ ४९॥
अनुवाद
इस वन में पके हुए दीर्घपत्री पौधों की यह गंध वायु के द्वारा अचानक उड़कर यहाँ आ गई है, और उसी से कड़वा रस निकल रहा है॥ 49॥
'In this forest this smell of the ripe long-leafed plants has suddenly come here driven by the wind, and this is causing the bitter juice to emerge.॥ 49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥