vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 11: पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना तथा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन
»
श्लोक 27-28h
श्लोक
3.11.27-28h
परिसृत्य च धर्मज्ञो राघव: सह सीतया॥ २७॥
सुतीक्ष्णस्याश्रमपदं पुनरेवाजगाम ह।
अनुवाद
इस प्रकार सर्वत्र विचरण करके धर्म के ज्ञाता भगवान राम सीता सहित सुतीक्ष्ण के आश्रम में लौट आये।
After roaming around in this manner everywhere, Lord Rama, the knower of Dharma, returned with Sita to the hermitage of Sutikshna. 27 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×