श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 11: पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना तथा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  3.11.27-28h 
परिसृत्य च धर्मज्ञो राघव: सह सीतया॥ २७॥
सुतीक्ष्णस्याश्रमपदं पुनरेवाजगाम ह।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सर्वत्र विचरण करके धर्म के ज्ञाता भगवान राम सीता सहित सुतीक्ष्ण के आश्रम में लौट आये।
 
After roaming around in this manner everywhere, Lord Rama, the knower of Dharma, returned with Sita to the hermitage of Sutikshna. 27 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)