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प्रविश्य सह वैदेह्या लक्ष्मणेन च राघव:।
तदा तस्मिन् स काकुत्स्थ: श्रीमत्याश्रममण्डले॥ २२॥
उषित्वा स सुखं तत्र पूज्यमानो महर्षिभि:।
अनुवाद
ककुत्स्थ कुल के रत्न श्री राम विदेहनन्दिनी सीता और लक्ष्मण के साथ उस भव्य आश्रम में प्रवेश करके सुखपूर्वक रहने लगे। वहाँ के महर्षियों ने उनका बहुत आदर-सत्कार किया।
Entering that glorious hermitage with Videhanandini Sita and Lakshman, Shri Ram, the jewel of the Kakutstha clan, lived there happily. The great sages there honoured him greatly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥