श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 11: पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना तथा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.11.2 
तौ पश्यमानौ विविधान् शैलप्रस्थान् वनानि च।
नदीश्च विविधा रम्या जग्मतु: सह सीतया॥ २॥
 
 
अनुवाद
सीता सहित दोनों भाई नाना प्रकार के पर्वत शिखरों, वनों और अनेक सुन्दर नदियों को देखते हुए आगे बढ़ने लगे॥ 2॥
 
The two brothers, along with Sita, began to move ahead, seeing various mountain peaks, forests and several beautiful rivers.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)