श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 11: पञ्चाप्सर तीर्थ एवं माण्डकर्णि मुनि की कथा, विभिन्न आश्रमों में घूमकर श्रीराम आदि का सुतीक्ष्ण के आश्रम में आना तथा अगस्त्य के प्रभाव का वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.11.15 
तत: कर्तुं तपोविघ्नं सर्वदेवैर्नियोजिता:।
प्रधानाप्सरस: पञ्च विद्युच्चलितवर्चस:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तब देवताओं ने उसकी तपस्या में विघ्न डालने के लिए पाँच प्रमुख अप्सराएँ नियुक्त कीं, जिनके शरीर की कांति बिजली के समान चंचल थी॥15॥
 
‘Then, to cause trouble in his penance, all the gods appointed five chief nymphs, whose body radiance was as fickle as that of lightning.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)