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अत्रैनं हि महाभागा: सर्वभूतहिते रता:।
अतिथिं पर्णशालायां राघवं संन्यवेशयन्॥ १५॥
अनुवाद
वे महाभाग महर्षि, जो समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहते थे, अपने प्रिय अतिथि भगवान् श्री रामजी को पर्णशाला में ले गए और उन्हें वहीं रखा॥15॥
Those Mahabhag Maharishis, who were always ready for the welfare of all living beings, took their favorite guest, Lord Shri Ram, to Parnashala and kept him there. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥