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ramayan 2.99.31: 'हाय! जो राज दरबार में बैठने तथा प्रजा और मंत्रियों से सेवा और सम्मान पाने के योग्य हैं, वे मेरे बड़े भाई श्री राम हैं, जो जंगली पशुओं से घिरे हुए यहाँ बैठे हैं।   |   ramayan सर्ग 2.99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.99.31 
य: संसदि प्रकृतिभिर्भवेद् युक्त उपासितुम्।
वन्यैर्मृगैरुपासीन: सोऽयमास्ते ममाग्रज:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
'हाय! जो राज दरबार में बैठने तथा प्रजा और मंत्रियों से सेवा और सम्मान पाने के योग्य हैं, वे मेरे बड़े भाई श्री राम हैं, जो जंगली पशुओं से घिरे हुए यहाँ बैठे हैं।
 
'Alas! The one who is fit to sit in the royal court and receive service and respect from the subjects and the ministers, is my elder brother Shri Ram sitting here surrounded by wild animals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)